ब्रेकिंग न्यूज़
Kanpur Municipal Corporation to Collect Fees from 2,500 Hoardings Across City, Seven-Day Deadline Given | Lucknow Airport Security Scare: Live Cartridge Found in Bags of Two Nepali Women During Screening | India vs Afghanistan T20I Series to Use FIFA World Cup-Grade Broadcast Technology at Delhi's Arun Jaitley Stadium | Sensex Bounces Back with 497-Point Surge, Rupee Strengthens as Market Recovers from Five-Day Slide | UP Cabinet Minister Announces Cashless Treatment and Uniform Allowance for PRD Jawans | Rishabh Pant Creates History with 100 Test Sixes — Fastest Ever to the Landmark | Dhamaal 4 Box Office: Ajay Devgn, Arshad Warsi's Comedy Sequel Makes Strong Comeback | Iran Declares "Fully Offensive" Military Posture as Ceasefire Talks Collapse, Oil Tops $90 a Barrel
K
Kanpur.live
कानपुर की आवाज़ | Voice of Kanpur
Back to Home

The Conman Who Sold the Eiffel Tower Twice Victor Lustig Story Still Considered Worlds Greatest Con

entertainment - Sun Jul 26

The Conman Who Sold the Eiffel Tower Twice Victor Lustig Story Still Considered Worlds Greatest Con
कल्पना कीजिए कि कोई आपको Eiffel Tower बेच दे — और आप उस पर विश्वास भी कर लें। सुनने में यह बिल्कुल असंभव लगता है, लेकिन 1925 में एक शातिर ठग ने ठीक यही किया — और वो भी एक बार नहीं, बल्कि दो-दो बार। यह कहानी है Victor Lustig की, जिसे इतिहास का सबसे बड़ा con artist यानी ठग माना जाता है। कौन था Victor Lustig: Victor Lustig एक Czech-born con artist था, जो कई भाषाएं बोल सकता था और अपनी charm और आत्मविश्वास से किसी को भी convince कर सकता था। उसने अपनी जिंदगी में कई देशों में, कई नामों से, अनगिनत लोगों को ठगा — लेकिन उसकी सबसे मशहूर और साहसी ठगी वो थी जब उसने खुद Eiffel Tower को बेचने की योजना बनाई। Eiffel Tower बेचने का Plan: 1925 में Lustig ने एक अखबार में एक article पढ़ी जिसमें बताया गया था कि Eiffel Tower के रखरखाव में सरकार को भारी खर्च करना पड़ रहा है, और कुछ अधिकारी सोच रहे हैं कि इसे तोड़ दिया जाए। Lustig के दिमाग में यहीं से एक अविश्वसनीय idea आया — क्यों न खुद को एक सरकारी अधिकारी बताकर Tower को "scrap metal" के तौर पर बेच दिया जाए? कैसे बुना गया जाल: Lustig ने खुद को फ्रांस के Deputy Director-General of the Ministry of Posts and Telegraphs के रूप में पेश किया। उसने देश के छह सबसे बड़े scrap metal dealers को एक secret, high-level meeting के लिए बुलाया। एक luxurious hotel में मीटिंग करते हुए उसने बेहद आत्मविश्वास से बताया कि सरकार गुप्त रूप से Eiffel Tower को तोड़कर scrap के रूप में बेचना चाहती है — और यह जानकारी strictly confidential रखनी होगी क्योंकि जनता में इसे लेकर विरोध हो सकता है। पीड़ित को कैसे चुना गया: Lustig ने बड़ी चालाकी से एक dealer को चुना, जो नया-नया business में आया था और खुद को एक elite group का हिस्सा महसूस करके बेहद उत्साहित था। Lustig ने उससे न सिर्फ Tower की "कीमत" वसूली बल्कि एक अतिरिक्त "bribe" भी ले ली — यह कहकर कि उसे इस deal को पक्का करने के लिए कुछ अधिकारियों को रिश्वत देनी होगी। पीड़ित dealer ने बिना किसी सवाल के भारी रकम चुका दी, क्योंकि वो इतनी बड़ी और गोपनीय डील का हिस्सा बनकर खुद को खास महसूस कर रहा था। दूसरी बार भी वही चाल: पैसा मिलते ही Lustig तुरंत Vienna भाग गया। हैरानी की बात यह है कि जिस dealer को ठगा गया था, उसने शर्मिंदगी की वजह से पुलिस में शिकायत तक नहीं की — क्योंकि उसे डर था कि लोग उसका मजाक उड़ाएंगे। Lustig को जब एहसास हुआ कि यह मामला कभी पुलिस तक पहुंचा ही नहीं, तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई। कुछ महीनों बाद उसने वापस Paris आकर बिल्कुल वही scheme दोबारा दोहराई — और एक दूसरे dealer को भी उसी तरीके से ठग लिया। Victor Lustig का आगे का सफर: Eiffel Tower की इस ऐतिहासिक ठगी के बाद Lustig ने अमेरिका जाकर भी कई बड़े fraud किए, जिनमें counterfeit currency से जुड़े मामले भी शामिल थे। आखिरकार उसे अमेरिकी अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया और उसे लंबी जेल की सजा हुई। यह कहानी क्या सिखाती है: Victor Lustig की यह कहानी मानव मनोविज्ञान की एक गहरी सच्चाई उजागर करती है — जब लोग खुद को किसी "खास" और "गोपनीय" अवसर का हिस्सा महसूस करते हैं, तो वो अक्सर अपनी सामान्य सतर्कता और तर्कशक्ति खो बैठते हैं। आज भी fraud experts इस कहानी का इस्तेमाल यह समझाने के लिए करते हैं कि scams कैसे काम करते हैं — चाहे वो 1925 का Paris हो या आज का digital युग, ठगी का मूल सिद्धांत हमेशा एक जैसा रहता है: लालच, गोपनीयता का भ्रम, और जल्दबाजी में लिया गया फैसला।

वो ठग जिसने Eiffel Tower को दो बार बेच दिया — Victor Lustig की वो कहानी जो आज भी दुनिया की सबसे बड़ी ठगी मानी जाती है

कल्पना कीजिए कि कोई आपको Eiffel Tower बेच दे — और आप उस पर विश्वास भी कर लें। सुनने में यह बिल्कुल असंभव लगता है, लेकिन 1925 में एक शातिर ठग ने ठीक यही किया — और वो भी एक बार नहीं, बल्कि दो-दो बार। यह कहानी है Victor Lustig की, जिसे इतिहास का सबसे बड़ा con artist यानी ठग माना जाता है। कौन था Victor Lustig: Victor Lustig एक Czech-born con artist था, जो कई भाषाएं बोल सकता था और अपनी charm और आत्मविश्वास से किसी को भी convince कर सकता था। उसने अपनी जिंदगी में कई देशों में, कई नामों से, अनगिनत लोगों को ठगा — लेकिन उसकी सबसे मशहूर और साहसी ठगी वो थी जब उसने खुद Eiffel Tower को बेचने की योजना बनाई। Eiffel Tower बेचने का Plan: 1925 में Lustig ने एक अखबार में एक article पढ़ी जिसमें बताया गया था कि Eiffel Tower के रखरखाव में सरकार को भारी खर्च करना पड़ रहा है, और कुछ अधिकारी सोच रहे हैं कि इसे तोड़ दिया जाए। Lustig के दिमाग में यहीं से एक अविश्वसनीय idea आया — क्यों न खुद को एक सरकारी अधिकारी बताकर Tower को "scrap metal" के तौर पर बेच दिया जाए? कैसे बुना गया जाल: Lustig ने खुद को फ्रांस के Deputy Director-General of the Ministry of Posts and Telegraphs के रूप में पेश किया। उसने देश के छह सबसे बड़े scrap metal dealers को एक secret, high-level meeting के लिए बुलाया। एक luxurious hotel में मीटिंग करते हुए उसने बेहद आत्मविश्वास से बताया कि सरकार गुप्त रूप से Eiffel Tower को तोड़कर scrap के रूप में बेचना चाहती है — और यह जानकारी strictly confidential रखनी होगी क्योंकि जनता में इसे लेकर विरोध हो सकता है। पीड़ित को कैसे चुना गया: Lustig ने बड़ी चालाकी से एक dealer को चुना, जो नया-नया business में आया था और खुद को एक elite group का हिस्सा महसूस करके बेहद उत्साहित था। Lustig ने उससे न सिर्फ Tower की "कीमत" वसूली बल्कि एक अतिरिक्त "bribe" भी ले ली — यह कहकर कि उसे इस deal को पक्का करने के लिए कुछ अधिकारियों को रिश्वत देनी होगी। पीड़ित dealer ने बिना किसी सवाल के भारी रकम चुका दी, क्योंकि वो इतनी बड़ी और गोपनीय डील का हिस्सा बनकर खुद को खास महसूस कर रहा था। दूसरी बार भी वही चाल: पैसा मिलते ही Lustig तुरंत Vienna भाग गया। हैरानी की बात यह है कि जिस dealer को ठगा गया था, उसने शर्मिंदगी की वजह से पुलिस में शिकायत तक नहीं की — क्योंकि उसे डर था कि लोग उसका मजाक उड़ाएंगे। Lustig को जब एहसास हुआ कि यह मामला कभी पुलिस तक पहुंचा ही नहीं, तो उसकी हिम्मत और बढ़ गई। कुछ महीनों बाद उसने वापस Paris आकर बिल्कुल वही scheme दोबारा दोहराई — और एक दूसरे dealer को भी उसी तरीके से ठग लिया। Victor Lustig का आगे का सफर: Eiffel Tower की इस ऐतिहासिक ठगी के बाद Lustig ने अमेरिका जाकर भी कई बड़े fraud किए, जिनमें counterfeit currency से जुड़े मामले भी शामिल थे। आखिरकार उसे अमेरिकी अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया और उसे लंबी जेल की सजा हुई। यह कहानी क्या सिखाती है: Victor Lustig की यह कहानी मानव मनोविज्ञान की एक गहरी सच्चाई उजागर करती है — जब लोग खुद को किसी "खास" और "गोपनीय" अवसर का हिस्सा महसूस करते हैं, तो वो अक्सर अपनी सामान्य सतर्कता और तर्कशक्ति खो बैठते हैं। आज भी fraud experts इस कहानी का इस्तेमाल यह समझाने के लिए करते हैं कि scams कैसे काम करते हैं — चाहे वो 1925 का Paris हो या आज का digital युग, ठगी का मूल सिद्धांत हमेशा एक जैसा रहता है: लालच, गोपनीयता का भ्रम, और जल्दबाजी में लिया गया फैसला।